Sunday, November 2, 2008
जीने का नजरिया
हिन्दी जगत, हिन्दी साहित्य की एक ऐसी काव्य रचना जिसने साहित्य जगत में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। आज के युवा जो व्यवसायीकरण से लाचार होकर अपने राष्ट्रभाषा से विमुख होते जा रहे है उन्हें यह काव्य रचना हिन्दी से जोड़े रख सकती है और उन युवाओ को जिंदगी जीने का नजरिया दे सकती है जिनके कदम आतंकवाद और अन्य हिंसक कार्यो की तरफ़ बढ़ रहें है। तो आइये युवाजोश के साथ नजरिये को एक राह दिखाएँ और राष्ट्रहित के लिए अपने कदम जोश के साथ आगे बढाये ....यहाँ क्लिक कर पढ़े.
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