
स्वतंत्रता आन्दोलन के कुछ क्रांतिकारी ऐसे है जिन पर वक्त ने ऐसी काली चादर डाली कि सिर्फ़ उनका नाम याद रह गया। शायद नाम भी गुमनाम हो गया है। मै कोशिश करूँगा की उन सब महान आत्माओं के बारे में अपने ब्लॉग पर लिखता रहूँ आज मै जिनके बारे में लिख रहा हूँ उनके बारे में एक ब्रिटिश इतिहासकार होम्स ने उनके बारे में लिखा है, 'उस बूढ़े राजपूत ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्भुत वीरता और आन-बान के साथ लड़ाई लड़ी। यह गनीमत थी कि युद्ध के समय उनकी उम्र अस्सी के करीब थी। अगर वह जवान होते तो शायद अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।' हम बात कर रहें है वीर कुंवर सिंह की जिनकी बहादुरी की व्याख्या मुमकिन ही नही। ८० साल के इस युवा को याद कर हमेशा हम युवाओ को जोश और कभी हार ना मानने कीशक्ति मिलती रहेगी। इस वीर महापुरुष को आपके और मेरे तरफ़ से सलाम। आइये इनके बारे में आगे पढ़े....पढ़ने के बाद अपनी टिपण्णी जरुर करे .....आगे








Arvindji aapne rastriya gaurav ko dikhaane kaa jo prayaas kiyaa hai woh saraahniya hai .Yadi sambhav ho to mahaapurshon ki vartmaan generation ki haalat par se bhi pardaa hataayen .jhalle ki jhalyaton main dilchaspi ke liye dhanyaavaad.
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