(न्यूयॉर्क से प्रकाशित डेली वर्कर के अंश)हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोशिएशन का घोषणा पत्र के कुछ अंश
(लाहौर कांग्रेस में बांटे गए इस दस्तावेज़ को मुख्य तौर पर भगवतीचरण वोहरा ने लिखा था। जब वे वितरित किया गया तो सीआईडी के हाथ लग गया और उसी के कागज़ों से इसकी प्रति मिली।)
स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है। भारत में स्वतंत्रता का पौधा फलने के लिए दशकों से क्रांतिकारी अपना रक्त बहाते रहे हैं। बहुत कम लोग हैं जो उनके मन में पाले हुए आदर्शों की उच्चता तथा उनके महान बलिदानों पर प्रश्नचिन्ह लगाएं, लेकिन उनकी कार्यवाहियाँ गुप्त होने की वजह से उनके वर्तमान इरादे और नीतियों के बारे में देशवासी अंधेरे में हैं, इसलिए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ने यह घोषणापत्र जारी करने की आवश्यकता महसूस की है......
......विदेशियों की गुलामी से भारत की मुक्ति के लिए ये एसोसिएशन सशस्त्र संगठन द्वारा भारत में क्रांति के लिए दृढ़ संकल्प है...... क्रांति कोई मायूसी से पैदा हुआ दर्शन भी नहीं है और न ही सरफ़रोशो का कोई सिद्धांत है। क्रांति ईश्वर विरोधी हो सकती है, लेकिन मनुष्य विरोधी नहीं। यह एक पुख़्ता और जिंदा ताकत है। नए और पुराने के, जीवन और जिंदा मौत के, रोशनी और अंधेरे के आंतरिक द्वंद का प्रदर्शन है, कोई संयोग नहीं........
‘नौजवान ग़ैर-जिम्मेदार नहीं’
.....हमारे देश के नौज़वानों ने इस सत्य को पहचान लिया है। उन्होंने बहुत कठिनाइयाँ सहते हुए यह सबक सीखा है कि क्रांति के बिना- अफ़रा-तफ़री, क़ानूनी गुण्डागर्दी और नफ़रत की जगह, जो आजकल हर ओर फैली हुई है - व्यवस्था, क़ानूनपरस्ती और प्यार स्थापित नहीं किया जा सकता। हमारी आर्शीवाद-भरी धरती पर किसी को ऐसा विचार नहीं आना चाहिए कि हमारे नौजवान ग़ैर-ज़िम्मेदार हैं। वे पूरी तरह जानते हैं कि वे कहां खड़े हैं। उनसे बढ़कर किसे मालूम है कि उनकी राह कोई फूलों की सेज नहीं है. समय-समय पर उन्होंने अपने आदर्शों के लिए बहुत बड़ी क़ीमत चुकाई है.इस कारण यह किसी के मुंह से नहीं निकलना चाहिए कि नौजवान उतावलेपन में किन्ही मामूली बातों के पीछे लगे हुए हैं. यह कोई अच्छी बात नहीं है कि हमारे आदर्शों पर कीचड़ उछाला जाता है. यह काफ़ी होगा अगर आप जानें कि हमारे विचार बेहद मज़बूत और तेज़-तर्रार हैं जो न सिर्फ़ हमें आगे बढ़ाए रखते हैं बल्कि फांसी के तख़्ते पर भी मुस्कराने की हिम्मत देते हैं...........
‘महात्मा गांधी का ढंग नामंज़ूर’
.....आजकल यह फ़ैशन हो गया है कि अहिंसा के बारे में अंधाधुंध और निरर्थक बात की जाए।महात्मा गांधी महान हैं और हम उनके सम्मान पर कोई भी आंच नहीं आने देना चाहते, लेकिन हम यह दृढ़ता से कह सकते हैं कि हम देश को स्वतंत्र कराने के उनके ढंग को पूर्णतया नामंजूर करते हैं। यदि हम देश में चलाए जा रहे उनके असहयोग आंदोलन द्वारा लोक जागृति में उनकी भागीदारी के लिए उनकों सलाम न करें तो यह हमारे लिए बड़ा नाशुक्रापन होगा. परंतु हमारे लिए महात्मा असंभवताओं का एक दार्शनिक हैं. अहिंसा भले ही एक नेक आदर्श है, लेकिन यह अतीत की चीज़ है. जिस स्थिति में आज हम हैं, सिर्फ़ अहिंसा के रास्ते से कभी भी आज़ादी प्राप्त नहीं कर सकते. दुनिया सिर तक हथियारों से लैस है और (ऐसी) दुनिया हम पर हावी है. अमन की सारी बातें ईमानदार हो सकती हैं, लेकिन हम जो गुलाम क़ौम हैं, हमें झूठे सिद्धांतों के ज़रिए अपने रास्ते से नहीं भटकना चाहिए. हम पूछते हैं कि जब दुनिया का वातावरण हिंसा की लूट और ग़रीब की लूट से भरा हुआ है, तब देश को अहिंसा के रास्ते पर चलाने का क्या तुक है? हम अपने पूरे ज़ोर के साथ कहते हैं कि क़ौम के नौजवान कच्ची नींद के ऐसे सपनों से रिझाए नहीं जा सकते.............
........भारत साम्राज्यावाद के जुए के नीचे पिस रहा है। इसमें करोड़ों लोग आज अज्ञानता और ग़रीबी के शिकार हो रहे हैं. भारत की बहुत बड़ी जनसंख्या जो मज़दूरों और किसानों की है, उनको विदेशी दबाव एवं आर्थिक लूट ने पस्त कर दिया है. भारत के मेहनतकश वर्ग की हालत आज बहुत गंभीर है. उसके सामने दोहरा ख़तरा है - विदेशी पूंजीवाद का एक तरफ़ से और भारतीय पूंजीवाद के धोखे भरे हमले का दूसरी तरफ़ से ख़तरा है. भारतीय पूंजीवाद विदेशी पूंजी के साथ रोज़ाना बहुत से गठजोड़ कर रहा है. कुछ राजनैतिक नेताओं का डोमिनयन (प्रभुतासंपन्न) का रूप स्वीकार करना भी हवा को इसी रुख़ को स्पष्ट करता है. भारतीय पूंजीपति भारतीय लोगों को धोखा देकर विदेशी पूंजीपति से विश्वासघात की कीमत के रूप में सरकार में कुछ हिस्सा प्राप्त करना चाहता है. इसी कारण मेहनतकश की तमाम आशाएं अब सिर्फ़ समाजवाद पर टिकी हैं और सिर्फ़ यही पूर्ण स्वराज और सब भेदभाव खत्म करने में सहायक हो सकता है.
करतार सिंह
अध्यक्ष रिपब्लिकन
प्रेस, अरहवन, भारत से
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-१)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-2)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-3)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़....... (भाग-4)
असेंबली बमकांड मामले की एफ़आईआर और धमाके के बाद फेंका गया पर्चा का हिंदी
भगत सिंह का युवाओ,विद्यार्थियों के नाम एक पत्र








ReplyDeleteभई अरविन्द जी,आपका ब्लाग खुलते खुलते पढ़ने का
ज़ोश जाता रहता है । कृपया अनावश्यक विज़ेट हटा दें,
और जावास्क्रिप्ट कम से कम प्रयोग करें ।
आपके पोस्ट के शीर्षक सार्थक लगते हैं,
पर अभी पढ़ नहीं पाया ।
How long ago was that? In the British Raj time? Aap kaise hain mere Bhai?
ReplyDeletemere dost,tum bahut accha kaam kar rahe ho,mere pass bhi HSRA ka manifesto hai,aur saath hi unka patra bhi hai.aap jo likh rahe,wah bahut hi kaabiletaarif hai,mai aapka aabhari hoon.
ReplyDeletedhanyawaad डा० अमर कुमार ji, sujhav aur margdarshan ke liye dhanyawaad,yathasanbhav maine jave scipt ko hata diya hai. aapka ek baar phir dhanyawaad
ReplyDeleteHi jenai,
ReplyDeleteye 1931 ki baar hai and ofcourse belongs to british raj time.
mai thik hu. aap kaise hai?
dhanyawaad आशुतोष दुबे "सादिक" ji, aapne tippani,aur apna bahumulya wakt hame diya , dhanyawaad
ReplyDeleteachcha laga arvind bhai
ReplyDeleteबसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामना
ReplyDeleteआपके ब्लॉग के नाम और फ़िर इस पोस्ट दोनों यही इंगित करती है कि आप देश और देश की समस्याओं से बहुत प्रेम और सरोकार रखते हैं.बड़ा ही शुभ संकेत है यह.
ReplyDeleteयुवा लहू जोश से भरपूर होता ही है परन्तु जोश के साथ होश अवश्य रखना चाहिए.हथियार तबतक नही उठाना चाहिए,जबतक कि शान्ति और अहिंसा के सभी रास्ते पूरी तरह बंद न हो गए हों. देश को आजाद कराने में जितनी बड़ी भूमिका गरम दल वालों की रही,उतनी ही नरमपंथियों की भी.
bahut barhiya..
ReplyDeleteyaha bhi tashreef layein
mere blog ka link hain :
http://merastitva.blogspot.com
घोषणा पत्र पढ़वाने के लिए साधुवाद. भारत की आजादी हेतु संघर्ष में गांधी के अहिंसक आन्दोलन की अहमियत तो खैर नकारी नहीं जा सकती, लेकिन युवा क्रांतिकारियों के कारनामों ने भी बहुत बड़ा रोल अदा किया .
ReplyDeletedhanyawaad kishore choudhary ji.......
ReplyDeletedhanyawaad purnima ji,aapko bhi basant panchami ki hardik shubhkaamnaye........
Ranjana jimai aapki baaton se bilkul sahmat hu,aur mai aapko vishwas dilata hun ki ham yuva josh ke saath hosh se bhi kaam lenge......
Than you the pink orchid..........
Hem pandey ji aapka bahut- bahut shukriya,aazadi me narampanthi aur garampanthi dono ki bhumika saman rahi hai.
अरविंद जी आपके ब्लॉग में बहुत बढिया जानकारी है। वैसे भी देशभक्ति हम लोगों की ताकत है और आप जैसे युवा अगर अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं तो इससे अच्छी कोई बात नहीं। पर आपके ब्लॉग का संयोजन, COLOR SCHEME आदि मुझे गहरे लाल रंग में उतनी अच्छी नहीं लगी। यह मत समझिए कि मैं इसमें कोई कमी निकाल रहा हूं पर यदि रंग संयोजन वगैरा अलग होगा तो आपका ब्लॉग और भी अच्छा लगने लगेगा।
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