पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने देश की उत्तर पश्चिमी स्वात घाटी में इस्लामी शरिया क़ानून को लागू करने संबंधी एक विवादास्पद समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.इससे पहले पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति से अपील की थी कि वो तालिबान के साथ स्वात घाटी में शरिया लागू करने के वादे को पूरा करें.
उल्लेखनीय है कि कुछ महीनों पहले पाकिस्तान की सरकार और तालिबान के बीच इस बात पर समझौता हुआ था कि पाकिस्तान की सरकार स्वात घाटी में शरिया क़ानून लागू करेगी. इस समझौते का पश्चिमी देशों ने विरोध किया था.
हालांकि संसद में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति ज़रदारी पर इस समझौते को मानने का दबाव था और संभवत उनके पास इस पर हस्ताक्षर के अलावा दूसरा और कोई रास्ता नहीं था.
संसद में जब इस समझौते से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया तो मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के सांसदों ने वाकआउट किया जबकि प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि वो इस संबंध में प्रांतीय सरकार और तालिबान के बीच हुए समझौते का सम्मान करते हैं और इस वादे को पूरा करना ज़रुरी है.
उल्लेखनीय है कि कुछ हफ्तों पहले स्वात घाटी में तालिबान ने यह कहते हुए समझौते को तोड़ने की धमकी दी थी कि सरकार ने घाटी में शरिया अदालतें शुरु करने की दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया है.
कुछ अन्य पोस्ट :
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-१)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-2)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-3)
भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़....... (भाग-4)
असेंबली बमकांड मामले की एफ़आईआर और धमाके के बाद फेंका गया पर्चा का हिंदी अनुवाद
भगत सिंह का युवाओ,विद्यार्थियों के नाम एक पत्र
स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है(घोषणा पत्र)








0 comments:
Post a Comment