महात्मा गाँधी ने राजनीतिक जीवन में सदाचार, सच्चाई और ईमानदारी पर ज़ोर दिया था. उन्होंने पिछड़े और ग़रीब तबक़े के विकास को सच्चा विकास कहा, सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, जातिवाद और हिंसा से दूर रहने का सबक़ सिखाया.भारत में आज राजनीतिक जीवन में ईमानदारी दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती. विकास हो रहा है लेकिन ग़रीबों और पिछड़ों का नहीं बल्कि महानगरों में रहने वाले मध्यवर्गीय और उच्चवर्गीय लोगों का. हिंसा, भ्रष्टाचार और जातिवाद भारत की बड़ी समस्याएँ हैं.
क्या महात्मा गाँधी ने इसी तरह के भारत का सपना देखा था? क्या महात्मा गाँधी के आदर्शों का पालन आज के युग में संभव है? क्या भारत की समस्याओं का हल गाँधीवाद में छिपा है? भारत में गाँधीवादी मूल्यों के पतन के लिए आप किसे ज़िम्मेदार मानते हैं?
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पहले तो मैं तहे दिल से आपका शुक्रियादा करना चाहती हूँ कि आपको मेरी शायरी पसंद आई!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिखा है आपने और गांधीजी को मैं हमेशा याद करती हूँ! उम्मीद करती हूँ कि सब लोगों ने गांधीजी को याद रखे है!
Haan ! Bharat Gaandhi kee aksar baatonko bhool gaya hai!
ReplyDeleteAazadee kee ladayee ke saath, saath Gandhi ji ne paryawaran ke baareme kitna kuchh kaha tha..un dino jab, "paryawaran waaD" ye shbd kiseene na likha tha, na suna tha...aur Bharat ne "pragati" ke naamse paryawaranki tabahee kar dee..!
Aapki "kahanee" blogpe comment ke liye dhanywad!
Pooree kahani blogpe maujood hai!
Balik, blogpe jobhi kahaniyan hain, wo sampporn hain...kishton me hokebhi..!
Aapka blog dekh khushee huee, ki,aap bade suljhe hue vichar rakhte hain!
... भारत में समस्याएँ-ही-समस्याएँ हैं ... समाधान भी हैं ... पर उपाय कौन करे ?...?...?...?...?...?...?
ReplyDeleteक्या महात्मा गाँधी के आदर्शों का पालन आज के युग में संभव है? क्या भारत की समस्याओं का हल गाँधीवाद में छिपा है? भारत में गाँधीवादी मूल्यों के पतन के लिए आप किसे ज़िम्मेदार मानते हैं?
ReplyDeleteHum sabhi ko milkar jawab dundhna hai.
namaste babli ji,
ReplyDeleteaapke shayari ko pasand karne ki vajah yahi hai ki aap bahut achha likhti hai...
Shama ji sahi kaha aapne hum tarakki ki aar me paryawaran ko bahut nuksaan pahuncha rahe hai..phir bhi abtak nind nahi khuli....agar ab aankh nahi kuli to aankh kulne ka wakt hi nahi rahega hamare paas.
ReplyDeleteश्याम कोरी 'उदय' ji,
ReplyDeletemanta hu bharat me dher saari samasyayen hai...magar eska samaaddan bhi hame hi dhundhana hoga....
aapne kuchh aisa sawal puchha hai...jiska javav aur samadhan hame saath-2 hi milegi.
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