यहाँ प्रस्तुत सभी पोस्ट मुख्यतः विकिपीडिया और बी बी सी के सौजन्य से है । बाकि पोस्टो का उल्लेख पोस्ट के साथ किया गया है।
मुख्य पृष्ट शान-ऐ-हिन्द अल्फाज़-ए-दिल अविश्वसनीय इंसान मानसिक उलझनें Here 4 English Blog संपर्क करें

Thursday, June 4, 2009

क्या थे महात्मा गांधी के अंतिम शब्द!

30 जनवरी, 1948 को दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे महात्मा गाँधी के पैर छूने के लिए झुका.... और जब उठा तो उसने एक के बाद एक तीन गोलियाँ महात्मा के सीने में दाग़ दीं थीं.
अब तक माना जाता है कि गोली लगने के बाद बापू 'हे राम!' कहते हुए गिरे थे और यह शब्द उनके पास चल रही उनकी पोती आभा ने सुने थे.
लेकिन एक नई पुस्तक 'महात्मा गांधी: ब्रह्मचर्य के प्रयोग' में बापू के अंतिम शब्द ‘हे राम’ पर सवाल उठाया गया है.
पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर की पुस्तक में दावा किया है कि 30 जनवरी, 1948 को गोली लगने के बाद महात्मा गांधी के मुख से निकलने वाले अंतिम शब्द ‘हे राम’ नहीं थे.
पुस्तक के अनुसार 30 जनवरी, 1948 को जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी थी तो बापू के सबसे क़रीब उनकी पौत्र वधु मनु गांधी थीं.
उन्होंने बापू के होठों से अंतिम शब्द ‘हे रा...’ सुनाई दिया था इसलिए मान लिया गया कि उनके अंतिम शब्द ‘हे राम’ थे.
नई पुस्तक में कहा गया है कि मनु के दिमाग में ये शब्द इसलिए आए क्योंकि उनके अवचेतन मन में नोआखली में महात्मा गांधी की कही हुई यह बात गूंज रही थी कि '' यदि मैं रोग से मरूँ तो मान लेना कि मै इस पृथ्वी पर दंभी और रावण जैसा राक्षस था. मैं राम नाम रटते हुए जाऊं तो ही मुझे सच्चा ब्रह्मचारी, सच्चा महात्मा मानना.''
अलग-अलग राय
किताब के अनुसार महात्मा गांधी के निजी सचिव प्यारेलाल का भी मानना था कि गांधीजी ने मूर्छित होते समय जो शब्द निकले थे वे 'हे राम' नहीं थे.
उनका कहना था कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द 'राम राम' थे. ये कोई आह्वान नहीं था बल्कि सामान्य नाम स्मरण था.
समाचार एजेंसी भाषा से बातचीत में जानी-मानी गांधीवादी निर्मला देशपांडे ने इस बात से असहमति जताई है.
निर्मला गांधी का कहना था कि उस शाम बापू जब बिड़ला मंदिर में प्रार्थना के लिए जा रहे थे तब उनके दोनों ओर आभा और मनु थीं. आभा बापू की पौत्री और मनु उनकी पौत्रवधु थीं.
निर्मला गांधी का कहना है कि जब बापू को गोली लगी थी तब उनके हाथ आभा और मनु के कंधों पर थे.
गोली लगने के बाद वे आभा की ओर गिरे थे। आभा ने स्पष्ट सुना था कि बापू के मुंह से आख़िरी बार ‘हे राम’ ही निकला था।
सौ : बी बी सी.




कुछ अन्य पोस्ट :भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-१)भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-2)भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़.......(भाग-3)भगत सिंह से जुड़े कुछ दस्तावेज़....... (भाग-4)असेंबली बमकांड मामले की एफ़आईआर और धमाके के बाद फेंका गया पर्चा का हिंदी अनुवाद भगत सिंह का युवाओ,विद्यार्थियों के नाम एक पत्र, स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है(घोषणा पत्र), मैं नास्तिक क्यों हूँ: भगत सिंह, गाँधी जी के नाम खुली चिट्ठी, स्वात में शरिया लागू करने को मंज़ूरी, 'पाक मंशा और प्रतिबद्धता पर सवाल', क्यूबा के प्रति अमरीकी नीति में बदलाव, 'कांग्रेस ने अंबेडकर के साथ न्याय नहीं किया' ,किसी कोने में रोता नहीं मिलूँगा: मनमोहन, प्रजातंत्र का एक पहलु सन् 1977 ,विश्वयुद्ध के भारतीय जाँबाज़ों की यादें, ग्रेट इंडियन चुनाव, इराक़ में आत्मघाती हमला, 11 की मौत, चुनाव पर क्या है माओवादियों का रवैया? ,1857: हिंदुस्तान का ख़याल, धर्म का असर ,ममता की एक मूरत: एक परिचय , नेहरु-गांधी परिवार का आनंद भवन , क्या भारत गाँधी को भूल गया है?

0 comments:

Post a Comment

Your Ad Here
Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा Promote Your Blog IndiBlogger - Where Indian Blogs Meet blogarama - the blog directory Blog Search
Blog Search, Blog Directory
Blog Directory Best Indian websites ranking Create Blog
Humor Blogs Top sites India blog search directory
BlogsByCategory.com Society Blogs - BlogCatalog Blog Directory Submit
Free Search Engine Submission
Free Search Engine Submission
Visit blogadda.com to discover Indian blogs www.blogvani.com